मराठी भाभी की चुदाई
 
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मराठी भाभी की चुदाई  

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 Anonymous
(@Anonymous)
Guest

इससे पहले आप पढ़ चुके है की कैसे प्रभा ने मुझे सताया और
मेरे लंड का मज़ाक उड़ते हुए परेशन करती रही.. अब उससे आयेज.. मई
मेरे रीडर्स के और खास कर सेक्सी फीमेल्स के मैल का बेचैनी से इंतेज़ार
कर रहा हून.. इस कहानी का अगला पार्ट किसी सेक्सी फीमेल से दोस्ती के बाद ही
लिखूंगा और सबसे पहले उसे ही भेजूँगा.. इसलिए देखिए कौन सबसे
पहले मेरी दोस्त बनती है और मज़ा लेती है.. अब आयेज..
एब्ब, मैने सोचा इसकी छूट को छत कर वो हालत करूँगा की ये भी याद
रखेगी की किसी छोड़ू से पाला पड़ा था और मैने हामी भर दी.उनकी छूट
को लीक करना ज़्यादा अक्चा संजा थूक के चठने से, तो वो मेरे पास आ
गयी, और मई नीचे बैठ गया और आप ्पर मुँह किया तो उसने आप नी छूट
मेरे मुँह पे रख दी, पहले मैने उसकी छूट होंटो (लिप्स) से चूसना
शुरू किया तो उन्होने मेरा सिर पकड़ लिया और आप नी छूट से सता लिया और
बड़े ज़ोर ज़ोर से आप नी छूट मेरे मुँह पे रगड़ने लगी, एब्ब मैने धीरे
से आप नी जीभ उसकी छूट के अंडर दल दी, उसके मुँह से सिसकियाँ निकालने
लगी.. मेरा लंड बहुत ज़्यादा टाइट हो गया था, मैने दोनो हंतो से उसके
चूतड़ दबाने शुरू कर दिए और जीभ और ज़्यादा अंडर बाहर करने
लगा, वो भी पूरा मज़ा लेने लगी, मैने उसकी छूट के दाने को होंटो मे
लिइया और चूसने लगा.. उसे मज़ा आने लगा था..फिर थोड़ी देर मे वो चिल्लाने
लगी और मेरे मुँह पर छूट को दबाने लगी..”आहह..संजूऊ.. तुम तो
एक्सपर्ट हू..आहह श इतना अच्छा तो किसी ने नही छूसा मुझे…आ
..नामिता को मालूम ही नहियिइ…अरी..अरे..संजूऊुउउ मई गाइिईईईईईईई”.. उसका
बदन सख़्त हो गया और वो झाड़ गयी उसने आप ना सारा पनाई मेरे मुँह
मे छोड़ दिया, उसने मेरे सिर को कस के पकड़ा हुवा था और आप नी छूट से
लगा के रखा था, इश्स लिए मुझे उसका पानी मुँह मे लेने के अलावा कोई और
चारा नही था, उूव क्या टेस्ट था, पहली बार किसी औरत्का इतना स्वादिष्ट
नमकीन पानी पिया था, अगले 2 मिनिट तक प्रभा भाभी वैसे ही मेरे
मुँह पे बैठी रही, फिर मैने उन्हो ज़्ातका दे के दूर फेक दिया. वो नीचे
गिर गयी, उसकी छूट अभी भी गीली थी, और वो आप नी छूट को हल्के हाथो से
सवार रही थी और मेरे तरफ देख के मुस्कुरा रही थी, और बोली, चलो मई
मान गयी की तुम जो मई कहूँगी वो करोगे.

उसकी पिंक छूट जो चूसने के बाद लाल हो चुकी थी, उसे देख के मेरा हाल
बुरा हो गया, और मई वही ज़मीन पे उसके आप ्पर चाड गया, और मेरा लंड
निकाला. उसने पहली बार सामने से मेरा लंड देखा और उसके मुँह से
निकल गया..”बाप रे.. इतना लंबाआ… जान लोगे क्या मेरी.. देखो तो कितना
मोटा है…ये घुसगा कैसे अंदर.?” मैने कुछ कहा नही और उसके पैर
फैलाए और लंड के सूपदे को उसकी छूट से सता दिया, तो उसने मुझे दूर
धकेल दिया और पनटी आप ्पर कर ली और ज़ोर ज़ोर से मुझे चिड़ते हुवे हासणे

लगी, और बोली, “नही प्यारे देवेर्जी यह आप पके लिए नही है, ये लंड लेने की
मेरी ताक़त नही है.. मुझे नही फदवाना मेरी छूट.”, मुझे बहुत घुस्सा
आ रहा था लेकिन कुछ कर भी नही सकता था, और थोड़ी ज़बरदस्ती करने
लगा तो बोली, “संजय क्या मेरा बलात्कार करोगे क्या.?”. बलात्कार वर्ड सुन
के मुझे अक्चा नही लगा और मई वही उसके सामने बेड पे जा के तकिये को
आप नी दोनो जंगो मे दबा के लंड से रगड़ना शुरू किया थोड़ी देर मे मई
ज़्ाद गया. फिर वो मेरे पास आई, तब तक सुबह के 5 बाज चुके थे, ना
उसकी नींद हुवी थी ना मेरी. फिर हम दोनो बेड पे लेट गये, बड़ी मिन्नत
करने पे उसने चिपक के सोने की पर्मिशन दी.

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Posted : 04/01/2015 5:03 am
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