रानी के साथ की यादे...
 
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रानी के साथ की यादें

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हेलो दोस्तों<br/><br/>यह मेरी आप बीती है, मेरा नाम साहिल है. मैं 26 साल का हूँ और गुरुग्राम में रहता हूँ, मेरा कद 5.9 इंच है, मैं फिलहाल जॉब ढूंड रहा हूँ और मेरा एक ही शौक है बॉडी बिल्डिंग मेरी 3 गर्लफ्रेंड रह चुकी है पर उनके साथ सेक्स में मुझे कोई ख़ास मज़ा नहीं आया, क्योंकी मुझे शुरू से ही औरतें ज्यादा पसंद है और मेरी ये इच्छा वहां पूरी हुई जहाँ मुझे उम्मीद नहीं थी और न कभी ऐसा सोचा था कभी.<br/><br/>उसका नाम रानी है और वो हमारे पास कई सालों से काम कर रही है, उसकी उम्र अब 43 साल है, उसके 2 बच्चे है; एक 18 साल की और एक 16 की, रंग गेहुआँ और बाकी सब कुछ बाद में बताऊंगा. हम्हे अब साथ में साल भर होने वाला है और इस में उसने मुझे वो बहुत सी चीज़े सिखा दी है; उस दिन सुबह से ही मौसम सेक्सी हो रहा था, मैं जिम से आया तो बारिश शुरू हो गई थी, मम्मी पापा ऑफिस चले जाते है और शाम को ही लौटते थे, मैं अपना नाश्ता बना के खा ही रहा था की तभी घंटी बजी, मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा की तेज़ बारिश हो रही थी और रानी भीगी हुई सामने खड़ी थी, मैंने उसे आने दिया " आपकी चाबी कहाँ है? " वो अपने आपको चुन्नी से ढकते हुए " जल्दी में घर पे रह गई " तब मेरी नज़र उसपे गई, उसका गुलाबी सूट गीला हो कर उसके बदन से चिपक गया था और उसके हर अंग उभर के दिख रहा था, मैंने उसे वहीँ रोका और जल्दी से एक तौलिया ला के दिया " आंटी आप अन्दर जाके सुखा लो, नहीं बुखार पकड़ लेगा, पहली बार मेरा ध्यान उसके शरीर पे गया, उसके मुम्मे बहुत मोटे थे वैसे वो हमेशा दुपट्टा ओढे रहती थी और कभी ध्यान भी नहीं दिया. वो मेरे कमरे में गई और मैंने पूरी तरह से उसे पीछे से ताड़ लिया, मुझे ध्यान आया की मेरा लण्ड खड़ा हो रहा था, मैं जाके नाश्ता करने लगा, पर मेरा मन कर रहा था की मैं जाके देखूं की वो क्या कर रही है, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, थोड़ी देर में वो आई और उसे देखते ही रही सही कसर पूरी हो गई और मेरा लण्ड पूरी तरह खड़ा हो गया, पहली बार उसे बिना दुपट्टा के देखा था, उस गुलाबी सूट के नीचे उसकी सफ़ेद ब्रा साफ़ दिख रही थी " साहिल मैं एक कप चाय बना लूँ? " मैंने ध्यान हटाया " आंटी इसमें पूछना क्या है एक कप मेरे लिए भी बना दो " वो चाय बनाने चली गई और मैं सोच में पड गया की उससे कैसे बात बड़ाई जाए, डर भी लग रहा था की कहीं मम्मी से न बोल दे, थोड़ी देर में वो चाय बना के लाइ और जैसे ही देने की लिया झुकी मेरी नज़र उसके बड़े मुम्मो पे गई, उसने देख लिया और तुर्रंत खड़ी हो गई, और थोड़ी दूर ज़मीन पे बैठ गई और टीवी देखना लगी, मैंने बात घुमाई " आंटी तुम एक जोड़ी कपडे यहाँ क्यों नहीं रख देती? मौसम ऐसा है काम ही आएगा " वो मुझे देख रही थी और मुस्कुराई " हम्म सही कह रहे हो, मैं अगर रुक जाती तो इतनी भीगती नहीं " , मेरी नज़र उस पे से हट नहीं रही थी और मेरा लण्ड पूरा तना हुआ था, मैं उठ भी नहीं सकता था की वो देख लेती, और जैसे ही वो किचन में गई; मैं उठ के बाथरूम भागा, मेरे दिमाग काम नहीं कर रहा था, मैंने साबुन का झाग बनाया और अपने मोटे सुपाडे को रगड़ने लगा ( मेरा लण्ड खड़ा होकर 6 इंच का है, पर मेरा सुपाड़ा काफी मोटा;जिसकी वज़हें से बचपन में ही डॉक्टर ने मेरा सुपाडे के ऊपर की खाल निकाल दी थी, और मुझे मुठ मारने के लिए साबुन या लोशन लगाना पड़ता है ), लण्ड पहली बार इतना उत्तेजित था सुपाड़ा फूल के टमाटर जैसा लाल हो गया था, मैं जल्द ही मैं झड़ने वाला था और जैसे ही मेरा माल छूटा, उसी वक़्त दरवाज़ा भी खुला, जल्दी में मैंने दरवाज़ा शायद अन्दर से बंद नहीं किया था और रानी खड़ी मुझे झड़ते हुए देख रही थी " ये क्या कर रहे हो? " , मैं डर के मारे कुछ नहीं बोल पाया और मेरा माल भी निकले जा रहा था; उसने फिर मेरे लण्ड को देखा और बाहर चली गई, मैं जल्दी से बाहर आ गया " आंटी;किसी को बताओगी तो नहीं? " . वो झाड़ू लगा रही थी " ये बात किसी से बोलने वाली नहीं है! " . उस दिन बस यही हुआ और जब तक वो काम करती रही मैं उसके सामने नहीं गया; बारिश भी थम गई थी और वो काम कर के चली गई, रात गई और बात गई.<br/><br/>दुसरे दिन वो आई और मैंने उसके लिए दरवाज़ा खोला, वो मुझे देख मुस्कुराई और किचन में गई, जाने से पहले उसने टेबल पे एक थैला रख दिया, मैं भी सोफे पे बैठ गया और टीवी देखने लगा, थोड़ी देर बाद वो झाड़ू लाग्ने लगी, मैंने दो तीन बार उसपे नज़र मारी और उसने तीनो बार देख लिया, मैं " आंटी उस थैले में क्या है " वो बोली " मेरे कपडे है एक जोड़ी यहीं रख रही हूँ " , मैंने और थोड़ी हिम्मत की " आंटी, वो कल की बात के लिए सॉरी " , टीवी पे फिल्म में किसिंग सीन आ गया, वो काम करते हुए " तुम्हारी गलती नहीं है, दिमाग तो खराब होगा ही " . मैंने चैनल चेंज कर दिया, वो झाड़ू करके चली गई और बर्तन करने लगी, मैं मौका ढूंढ के उसके पास जा रहा था और वो भी भांप रही थी, पर और कुछ बात करने की हिम्मत नहीं हुई, कहीं बिदक जाए और शिकायत कर दे, मैंने तय किया की धीरे धीरे बात आगे बढ़ाऊंगा.

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Topic starter Posted : 21/10/2021 3:45 pm
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दूसरे दिन से मैंने अपनी कोशिश शुरू कर दी,<br/><br/>मैं नाश्ता कर रहा था. वो दरवाज़ा खोल अंदर आ गई " आओ आंटी नाश्ता कर लो! " वो अचंबित हो गई " क्या हुआ साहिल आज तो तुम अच्छे मूड में लग रहे हो, नहीं तो कुछ बोलते ही नहीं हो मुझसे! " , मुझे अपने दोस्त की बात याद आई की अगर बात नहीं करोगे तो कुछ काम नहीं बनने का ; मैं " चलो तुमको अच्छा नहीं लगता तो नहीं करता! " वो हंस पड़ी " नहीं मेरा मतलब है, अगर कोई बात करता रहे तो मन लगा रहता है! " . वो किचन में चली गई और मैंने भी फटा फट अपना अंडरवियर उतार दिया और शॉर्ट्स पहन ली, वो बर्तन धो रही थी और उसका सफ़ेद ब्रा नीली कमीज के नीचे चमक रही था, मैं उसे देखता रहा और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, मैं उसके पास गया और प्लेट रख दी " आंटी ज़रा इसे भी धो देना " वो मुड़ी और उसकी नज़र शॉर्ट्स में मेरे तनाव पे गई, उसके हाथ से बर्तन फिसल के गिर गया, मैं अनजान बनते हुए " क्या हुआ आंटी घर से लड़ के आई हो? " . मैं वहीँ खड़ा हो गया " आंटी एक बात बताओ तुम्हारी क्या उम्र है? " वो हंस पड़ी " होगी 42 के आस पास, क्यों क्या करोगे? " . उसकी नज़र फिर मेरे तनाव पे गई जो अब ढीला हो गया था, मैं बात करता रहा " और शादी कब हुई? "<br/><br/>वो " शादी मेरी 17 साल में हो गई थी " वो भी मेरी बातों पे ध्यान दे रही थी, ऐसे ही चलता रहा, और धीरे धीरे उसके काफी बातें और हंसी मज़ाक होने लगा, और मुझे पता लगा की उसका पति किसी और औरत के चककर में पड़ा हुआ है मैंने अपनी कोशिश तेज़ कर दी.<br/><br/>एक दिन सुबह मौसम बड़ा कातिल हो रहा था, मैं कुछ ढूँढ रहा था और उसके कपड़ों वाला थैला मेरे हाथ लग गया, खोलके देखा तो उन कपड़ो में उसकी एक काली ब्रा और लाल फूलों वाली पैंटी भी थी, उसकी ब्रा का साइज ४० डी था, उतने बड़े कप देख के ही मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, मैंने उसके कपडे वापिस रख दिए और उसकी पैंटी लेके अपने कमरे में चला गया, उसकी पैंटी सूंघ के मेरा लण्ड और कैड़ा हो गया मैं लेट के उसकी पैंटी से लण्ड को सहला रहा था, इतने में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई, और उस वक़्त मुझे कुछ नहीं सूज रहा था, मैं किचन में गया, वो बर्तन कर रही थी " आ गए, क्या कर रहे थे? " मेरा लण्ड पूरा तना हुआ था मैंने हिम्मत करके उसे जाके पीछे से पकड़ लिया और उसे चूमने लगा " आंटी अब मुझसे नहीं रहा जाता " वो हंस पड़ी " हऐ मेरा बच्चा, आज हिम्मत कर ही दी तुमने, छोड़ो मुझे तुम्हारा चुभ रहा है मुझे, मेरी हिम्मत और बड़ी और मैंने उसे घुमा दिया और आगे बाद के उसके होंठ चूम लिए " आंटी तुम्हे पता था? " , उसने भी मुझे पकड़ लिया " और क्या मेरे राजा इतने दिनों से देख रहीं हूँ की तुम क्या कर रहे हो " . मैं उसका हाथ पकड़ के कमरे की तरफ जाने लगा, उसने रोक दिया " इतने दिनों से सब्र रखा है तो थोड़ा और सही, पहले काम ख़तम कर लूँ " , वो भी उतावली थी और उसने जल्दी जल्दी बर्तन कर दिए, मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैं उसे लेकर कमरे में गया और उसके रसीले होटों को चूमने लगा और उसके दुपट्टा उतार दिया और उसे बिस्तर पे बैठा दिया, मैं उसके साथ बैठ गया और उसकी कमीज उठाने लगा " आंटी बहुत दिनों से इस दिन का इंतज़ार था, आज तुमको जी भर के प्यार करूँगा " उसने भी कमीज उतारने दी और उसके मोटे मुम्मे देख मैंने गहरी आह भरी " रानी आंटी तुम्हारे मुम्मे कितने बड़े और सुन्दर है! " , दो बच्चों के हिसाब से उसके मुम्मे और शरीर कसा हुआ था, मैंने उसकी ब्रा उतारनी चाही " रानी अब और मत सताओ आज़ाद कर दो इन्हे, उसने ब्रा उतार दी " साहिल कैसे इतने गरम हो रहे हो? " मैंने उसकी पैंटी जेब से निकाली और उसे सूंघा " रानी तुम्हारी खुशबू ने आज मुझे बेकाबू कर दिया है " मैंने अपनी शॉर्ट्स उतार दी, और मेरा लण्ड अंडरवियर पे ज़ोर लगा रहा था " देखो कैसे फाड़ के बाहर आना चाह रहा है " उसने तआव को देख " साहिल तुम तो बहुत जोश में लग रहे हो " मैं पास गया और उसका हाथ अपने लण्ड पे रख दिया " रानी इसे बाहर निकालो " , उसने मेरा अंडरवियर नीचे सरकाया और मेरा लण्ड देख अहह भर गई " हऐ साहिल तुम्हारा ये कैसा हथोड़े जैसा है " हाथ लगाने में हिचक रही थी " साहिल ऐसा कभी नहीं किया मैंने और वो भी अपने से आधे उम्र के लड़के के साथ " मैंने उसके मुम्मो को हाथो में लिया और उसके निप्पल को जीब से सहलाने लगा " इतने बड़े मैंने आज तक फिल्मो में ही देखे है " वो भी मेरे सुडौल शरीर को छूके मज़े ले रही थी, मैंने उसे लेता दिया और उसके ऊपर चढ़ के उसके मुम्मे चूसने लगा, वो गरम हो रही थी, मेरा लण्ड उसके पेट पे लगा और वो कांप उठी " अह्ह्ह साहिल कितना गरम हो रहा है तुम्हारा, थोड़ा आराम कर लो " , मैं बहुत गरम हो गया था और मेरा लण्ड पत्थर जैसा सख्त और सुपाड़ा फूल के टमाटर जैसा हो गया था, मैं उसके होटों को चूमने लगा और अपना सय्यम खो रहा था, मुझे औरत का साथ मिले हुए कई साल हो गए थे और मैं उतावला होने लगा, और एक दम से मैं उसके ऊपर ही झड़ने लगा, वो मेरी पीठ रगड़ रही थी मैं थक के उसके ऊपर ही लेट गया " रानी ये तो गलत हो गया, बिना कुछ करे ही छूट गया " मेरा सारा माल उसके पेट और सलवार पे गिरा हुआ था. वो " कोई बात नहीं पहली बार ऐसा हो जाता है, अगले में ठीक हो जाएगा, मैंने उसके खड़े निप्पल को चूमा " तुम्हारी सलवार भी सन गई है " वो उठी " रुको मैं साफ़ होके आती हूँ " . थोड़ी देर बाद उसने मुझे आवाज़ दी " साहिल मेरी सलवार पकड़ाना " मैं दरवाज़े पे गया और जैसे उसने खोला मैं अंदर घुस गया, वो चौंक गई " हऐ राम, क्या करते हो! " उसने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी और उसके मांसल टाँगे गज़ब थी, मैं उसकी पैंटी नीचे सरकाने लगा, वो मना करने लगी " नहीं साहिल रुक जाओ मुझे शर्म आ रही है " मैं नहीं माना और उसकी पैंटी उतार दी उसके चूतड़ों को पकड़ के अपनी आप से सटा दिया, उसका हाथ मेरे लण्ड से छूआ " अरे पहले इसे तो खड़ा कर लो " मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पे रख दिया " लो आंटी तुम ही खड़ा करो " वो लण्ड सहलाने लगी और मैं उसकी झाटों में हाथ फेरने लगा " रानी इसे काट लो, चाटते समय बीच में आएँगे " वो उछल " चलो हटो! नीचे कौन चाटता है, गंदे कहीं के " , मेरी ऊँगली उसके छोले से टकराई और उसकी सिसकी निकल गई " अहह साहिल धीरे हलके से करो " मैं धीरे धीरे उकसे छोले को सहला रहा था " रानी जल्दी से नहा लो, मैं तुम्हे चाटूँगा " . थोड़ी देर में वो आई, उसे देख मेरी साँसे रुक गई. उसने छाती तक तौलिया लपेटा हुआ था और उसका जिस्म गीला था, वो मेरे पास आई " क्या हुआ, क्या देख रहे हो " मैं खड़ा हुआ और उसके होंठो को प्यार से चूमा " रानी ये सब कहाँ छुपा रखा था आज तक " वो मेरी बाहों में पिघल सी गई. उसे देख के ही मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, मैंने उसे लण्ड पकड़ाया " देखो तुम्हे देखते ही खड़ा हो गया " . उसने बड़े प्यार से लण्ड को पकड़ा और सुपाडे पे हाथ फेरने लगी " मैं सही कर रही हूँ या गलत, पता नहीं " मैंने उसका तौलिया खोल दिया " जब इतना आ गई हो तो सब ठीक है, अब बस होने दो सब कुछ " , मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला और उसके नितम्बो को गूंदने लगा " रानी तुम्हे देख के लगता नहीं है की तुम्हारे दो बच्चे है " मैं उसे बिस्तर पे लेटा दिया और उसकी पैंटी उतार दी, और उसकी नाभि से चूमता हुआ नीचे जाने लगा, वो आहें भरने लगी " अह्ह्ह साहिल हहह, क्या कर रहे हो नहीं वहां मुँह मत लगाओ " . मैं उसकी झांटें सहलाता रहा और उस हिस्से को चूमता रहा, वो पूरी तरह गरम पड़ी थी, मैंने उसकी चूत की फांके फैलाई और उसका मोटा छोला, खड़ा हुआ था " रानी इसके बाद तुम मेरी हो " मैं उसे हलके से चाटा, वो चिल्ला पड़ी " अह्ह्ह्ह साहिल सससस " मैं उसे चाटने लगा और एक ऊँगली भी उसकी गीली चूत में उतार दी, वो ज़ोर ज़ोर से अह्ह्ह भर रही थी, और बस मेरा नाम लिए जा रही थी " अहह साहिल हहह हहह " , उसे देख के लग रहा था, रमेश ने कभी ये सब नहीं किया, मैं उसके छोले को कभी हलके से सहलाता कभी ज़ोर से, पूरा कमरा उसकी आहों और सिसकियों से गूंज रहा था, वो अपने चरम पे आ रही थी, मैं उसके ऊपर आ गया और उसने, पैर फैला दिए और मेरे लैंड को अपनी गीली चूत पे रख दिया, मैंने हल्का सा झटका मारा और मेरा सुपाड़ा खप से उसकी चूत में चला गया, वो ज़ोर से " अह्ह्ह साहिल धीरे बहुत मोटा है दर्द हो रहा है " , उसकी चूत मेरे सुपाडे को कस के पकड़ रही थी. मैंने और जोर लगाया और उसकी गीली चूत में मेरा लण्ड समाने लगा, करते करते मैंने पूरा अंदर डाल दिया " रानी मेरे पास कंडोम नहीं है " वो गहरी सांस भरते हुए, उसकी आँखे भी नम थी " ये पहले सोचना चाइये था, बस अन्दर मत छोड़ना! " . मैंने उसके होंठ चूमे और उसने पूरी तरह मेरा साथ दिया और मेरे निचले होंठ चूसने लगी, मैं धीरे धीर झटके मारने लगा, और हर झटके के साथ वो और उत्तेजित होने लगी, और नीचे से खुद भी झटके दे रही थी " अह्ह्ह साहिल ऐसे ही बस अंदर तक लगाते रहो, रुकना नहीं " . मैं उसे पूरा अन्दर तक को जोत रहा था, उसकी चूत काफी कसी हुई थी, पांच मिनट में ही ; मुझे फिर झड़ने का एह्सास होने लगा " रानी अह्ह्ह मुझे हो जाएगा " मैंने लण्ड खींचना चाहा, पर उसने अपने टांगों से मृ कमर को कास लिया " हहह साहिल, अभी नहीं रुके रहो और करते रहो " मैं फिर जुताई में लगा गया, और अगले ही पल वो ज़ोर से चिल्ला पड़ी और कांपने लगी, मैं उसे ताबड़ तोड़ छोड़ रहा था ;उसकी चूत मेरे लण्ड पे कसी हुई थी और उसे काबू करना मुश्किल हो गया और मैं भी झड़ने लगा " ओह्ह्ह रानी मेरा छूट रहा है अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह " पर वो अपने में मस्त थी और मैं उसके अन्दर ही झड़ गया, थोड़ी देर हम वैसे हे पड़े रहे, मैं उसके ऊपर से हटा " आंटी कैसा लगा? " वो उठ के बैठ गई " बहुत अच्छा, मेरा अंग अंग खुल गया, याद भी नहीं आखरी बार कब किया था, हो गए चार पांच साल " . मैंने उसे फिर लेटा लिया " आओ लेटो ना कहाँ जा रही हो अभी दिल नहीं भरा " . वो हंसने लगी " तुमने जो मेरे अंदर भर दिया है, उसे बाहर निकलने दो ; कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए " . मैं उसके साथ बैठ गया " तुमने भी रोका नहीं, मैं आज ही जाके एक बड़ा पैकेट कंडोम ले आऊंगा " . वो मेरी जांघो पे हाथ फेरने लगी " उस टाइम मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, हाथ पैर ढीले पड़ गए थे, अब से ख्याल रखना ; अभी जाने दो लेट हो गई हूँ, कल के लिए भी कुछ छोड़ दो! " . मेरा अभी और मन था, पर उसकी चाल से लग रहा था, की उसकी बस हो गई है. जाते जाते बोल के गई " तुमने अपनी आंटी को फिर से औरत होने का एहसास दिला दिया है "

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Topic starter Posted : 21/10/2021 3:45 pm
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बड़े दिनों बाद मुझे औरत का साथ मिला था, और मैं उसके बारे में सोचते सोचते सो गया, शाम को मार्किट से 20 पीस का मैनफोर्स रिब्बड कंडोम का पैकेट खरीद लाया, अब तो सब होता रहना था.<br/><br/>दूसरे दिन.<br/><br/>मैं जिम से आने में लेट हो गया, वो आपने काम में लगी हुई थी, मैं किचन में गया और उसे देख मेरी धड़कने तेज़ हो गई, वो काले रंग का सूट पहने थी, लिपस्टिक और बिंदी लगा के बहुत सेक्सी लग रही थी, मैंने उसे जाके पीछे से पकड़ लिया " क्या बात है आंटी, आज तो बिजली गिरा रही हो " , वो शर्मा गई " बिजलियाँ तो तुमने गिराई है मुझपे, कल घर जाके भी शरीर में से तुम्हारी खुशबू आ रही थी " . मैंने उसे चूमना शुरू किया और उसके कानो में गरम साँसे भरी " ओह्ह आंटी मैं भी रात भर जगा रहा और मेरा पप्पू भी. देखो कितना उतावला हो रहा है तुमसे मिलने को! " मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पे लगाया " , उसने मेरे खड़े होते हुए लण्ड को टटोला " अभी जिम से आए हो कुछ खा पी के ताक़त बढ़ा लो;आज तो मैं टाइम निकाल के आई हूँ " . मैं कमीज के ऊपर से उसके मुम्मे सहलाने लगा " थोड़ी देर इनसे खेलने दो, इनसे प्यार हो गया है मुझे " . वो हसने लगी " ऐसा क्या है इनमे जो तुम्हे प्यार हो गया? कभी देखे नहीं? " . मैंने उसे घुमा दिया और उसके होंठ चूम लिए " रानी इतने बड़े नहीं देखे कभी, जिनके देखे है उनके इसके आधे भी नहीं थे " . वो छेड़ने लगी " अच्छा तो पहले चख चुके हो इसका स्वाद? " . मैंने उसे उठा के ऊपर बिठा दिया " हाँ! तीन लड़कियों के साथ किया है, उनके साथ कल जैसा मज़ा, मैं तुम्हारा कायल हो गया " . वो मेरे गले लग गई " साहिल मुझे भी इतना अच्छा कभी नहीं लगा, मैंने कभी ऐसा सुख नहीं पाया था, मेरे अन्दर की ललक की जगा दी तुमने " , मैंने उसकी कमीज उतार दी, उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी " रानी तुम बहुत सेक्सी लग रही हो इस काले ब्रा में! " . मैंने उसके छाती को चूमने लगा, वो तड़प रही थी " अहह साहिल मुझे आंटी कह के पुकारो "<br/><br/>मैंने उसकी ब्रा स्ट्राप सरकाई और उसके कंधे को चूमा " आंटी अह्ह्ह तुम बहुत सेक्सी हो!! " वो बहक चुकी थी, मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके बड़े मुम्मो को चूसने लगा, वो भी मेरा मुँह उनपे दबा रही थी, उसके निप्पल तन के सख्त हो गए थे, वो मेरे लोअर के ऊपर से ही मेरे लण्ड को सहला रही थी. मैंने लोअर नीचे किया और मेरा लण्ड लपक के उसके हाथ में आ गया, वो मेरे टोपे को सहलाने लगी " ओह्ह साहिल कितना तगड़ा है तुम्हारा " . मैंने किचन में ही अपने कपडे उतार फेकें और उसका नाडा खोलने लगा. वो हसने लगी " क्यों साहिल बहुत जल्दी में हो?, खेलो थोड़ी देर अपनी आंटी के साथ " मैंने उसका नाडा खोल उसकी सलवार उतार दी " वही तो कर रहा हूँ आंटी, कल तो पहली बार था आज तो बहुत कुछ करना है! " . उसकी गुलाबी पैंटी देख " क्या बात है आंटी तुम तो आज बड़ी मस्त हो कर आई हो, क्या इरादे है? " , वो मुझसे लिपट गई और मेरे कान में बोली " मेरे राजा अब ये रानी सिर्फ तुम्हारी है " , वो सुनते ही मैंने अपने होंठ उसके होटों पे रख दिए और हम एक दुसरे को ताबड़ तोड़ चूमने लगे, वो एक हाथ से मेरा लण्ड पकडे हुए थी और दुसरे हाथ से मेरे टटो से खेल रही थी, ये फरक होता है, एक अनुभवी औरत में, वो बिन कहे वो सब कुछ कर रही थी जो एक आदमी को पसंद होता है, बस देखना था की, लण्ड चूसने पे उसकी क्या प्रतिकिय्रा होगी. मैं उसे चूमते हुए नीचे गया, और उसकी पैंटी नीचे सरका दी, और उसे बाल में हाथ फेरा " काट के नहीं आई? " , मैंने उसे उठा लिया और उसने मुझे टांगो से जकड लिया " चलो मैं काटता हूँ! " , मैं उसे कमरे में ले गया और बिस्तर पे लेता दिया, और अपना क्लिपर निकाल लाया, वो ज़मीन पे बैठी हुए थी " बिस्तर पे बाल बिखर जाते! " मैंने जल्द ही उसकी चूत चिकनी कर दी और उसकी गीली फांकों में ऊँगली फेरी " अब आएगा मज़ा चाटने में! " , उसे ऊपर बिठाया और उसकी टाँगे फैलाई और उसकी चूत की फांको में अपनी जीब फेराइ, वो तड़प गई " अह्ह्ह्ह सससससाहिल क्या अच्छा लगता है इसमें? " , उसकी चूत सूजी हुई लग रही थी और ऊगली डालने में वो सिसक भी रही थी, जब वो अपने चर्म पे आने लगी मैंने उसे छोड़ दिया, और उसके ऊपर लेट गया " रानी, सूज क्यों रही है? " , उसने हाथ बड़ा के मेरे लण्ड को पकड़ा और अपने छोले पे रगड़ने लगी " करते भी खुद हो और पूछते भी हो, ये क्या बात है? " . मैंने हलके से उसके होटों को चूमा " आंटी उलटी हो जाओ " . वो उलटी लेट गई और मैं उसपे लेट गया, मैं उसे चूमने लगा और उसके पैर फैलाए, और उसका छेद ढूंढ़ने लगा, उसकी चूत बिलकुल गीली थी, और लण्ड बार बार फिसल जा रहा था, उसने हाथ घुमा के लण्ड को अपनी चूत पे लगाया " नहीं लाए निरोध? रोज़ रोज़ सही नहीं है ऐसे " . मैं रुक गया और जल्दी से दराज़ में से निकाला और लगा लिया, उसने जल्दी से लगाया और मैंने धीरे से ज़ोर लगाया, कुछ वो गीली थी कुछ कंडोम चिकना था, टोपा अंदर घुस गया, वो हलके से चिल्लाई " आई माँ साहिल धीरे दर्द हो रहा है " मैं रुक गया " रानी कल तो कुछ नहीं हुआ आज क्या हुआ " . वो गहरी साँसे भर रही थी " जाने दो बस धीरे धीरे करो " , मैं उसे धीरे धीरे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद मैं उसे घोड़ी बनाया जैसे ही डाले लगा, उसने रोक दिया " इसे उतार दो, ये लग रहा है, जब छूटे तो निकाल लेना " मैंने फटा फट कंडोम उतारा और घोड़ी चढ़ गया, जैसे ही लण्ड उसके गरम चूत में घुसा, मज़ा सा आ गया " हऐ रानी आंटी आज तो कुछ जायदा ही गरम हो रही हो " मैंने उसकी गांड के छेद को छुआ और उसे हलके हलके रगड़ने लगा, पहले तो वो तिलमिलाई, पर जल्दी ही शांत हो गई " अह्ह्ह साहिल हहह हहह " वो झड़ने के करीब थी, मैं रुक गया और उसके गांड के छेद को रगड़ने लगा, वो ज़ोर से आहे भरने लगी " हऐ साहिल, ठीक से आगे पीछे करो अह्ह्ह " , मैंने एक ज़ोर का झटका दिया और उसे चोदने लगा, मैंने उसकी गाड़ को चिकना किया और ऊँगली डाल दी वो चिल्ला पड़ी " ओह्ह्ह माँ " और ज़ोर से झड़ने लगी मैंने उसे पकड़ लिया और उसे चोदता रहा, वो निढाल हो गई, पर मैं चोदता रहा, मैं झड़ने वाला था " ओह्ह रानी मैं झड़ रहा हूँ अह्ह्ह्हह हहहहह " , वो मुझे लेके मुँह के बल लेट गई, दो तीन पिचकारी उसके अंदर ही छूट गई, मैंने लण्ड बाहर निकाल दिया हुए उसकी गांड पे रख दिया, और हलके से डालने की कोशिश की, उसने हाथ घुमा के लण्ड पकड़ लिया " ना यहाँ नहीं " , मैं उसपे लेटा रहा " रानी अच्छा लगा? " वो " बहुत अच्छा " मेरा लण्ड उसकी गांड में सट रहा था, मैं धीरे धीरे झटके लगा रहा था " आंटी पहले कभी ऐसे किया है? " वो " नहीं रे बाबा करना भी नहीं है, अपना देखा है! " . उसकी गांड मेरे माल से चिकनी हो रही थी, मैंने फिर ज़ोर लगाया और सुपाड़ा उसके छेद पे टकराया, वो चिल्ला पड़ी " माँ! क्या कर रहे हो, नहीं जाएगा वहां आई " . मैं हलके हलके आगे पीछे करने लगा, वो हसने लगी " क्या कर रहे हो? अपनी आंटी का ख्याल करो, अभी हटे हो, फिर त्यार हो गए "

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Topic starter Posted : 21/10/2021 3:45 pm