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मेरे दीदी की नौकरानी - रेखा  

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 Anonymous
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बात कोई तीन साल पुरानी है। मैं तब २६ साल का गबड़ू जवान था। नई-नई नौकरी हुई थी और मैं अपनी दीदी-जीजाजी के घर पर हीं रहता था। करीब छः महिने हो गए थे और मैं मुश्किल से करीब ३०-४० दिन हीं घर पर रह पाया था, लगातार टूर पर हीं ज्यादा रहना होता था। जब घर पर होता तो मेरा कमरा ऊपरवाली मंजिल पर बना घर का एक्स्ट्रा कमरा होता था, जो वैसे बंद हीं रहता। असल में मैंने खुद उस कमरे को चुना था। नीचे दीदी-जीजाजी को मेरे रहने से आपस में चुहलबाजी करने में थोड़ी परेशानी होती थी। जीजाजी तो फ़िर भी शुरु के कुछ दिनों के बाद खुल गए थे, पर दीदी को मेरे सामने जीजाजी के चालों का जवाब देने में परेशानी होती, जो मैं भांप कर हीं अलग उपर के कमए में रहने लगा। वैसे उस कमरे का आमतौर पर इस्तेमाल दीदी के घर की नौकरानी रेखा करती थी। १७-१८ साल की रेखा खुब हंसमुख थी और उसको दीदी-जीजाजी की चुहलबाजी और छेड़-छाड़ देख कर खुब मजा आता था। मैंने देखा था कि वो भी कभी-कभी उस छेड़-छाड़ में शामिल हो जाती। वैसे सब आपस में खुब खुश थे। जब मैं घर पर नहीं रहता तब रेखा हीं उपर वाले कमरे में रहती, और जब मैं रहता तो उसको किचेन में सोना होता, पर बाथरूम वो मेरे कमरे का हीं इस्तेमाल करती। मैं तब सोया हीं रहता था जब वो मेरे कमरे के बाथरूम में घुसती। वो नहाने-धोने के बाद हीं किचेन में जाती, सब का चाय बनाती और फ़िर सबको जगाती। सब ठीक-ठाक चल रहा था कि एक दिन सब शुरु हो हीं गया।

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Posted : 14/11/2011 8:29 am
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Posted : 14/11/2011 8:30 am
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उस दिन जब मैं बाथरूम में गया तो देखा कि कमोड के रिंग के उपर पर ७-८ बाल पड़े हुए हैं, लम्बे, काले, घुंघराले बाल। देखते हीं समझ गया कि ये रेखा की झाँट के बाल हैं, क्योंकि मैं अपने झाँट को अक्सर कैंची से काट कर छोटा कर लिया करता था। उस दिन पहली बार रेखा को ध्यान में रख कर मूठ मारी। इसके बाद जो जैसे यह रोज का नियम हो गया। मैं बाथरूम में रेखा की झाँट के बाल खोजता, और वो रोज मुझे मिलता भी। फ़िर मैं उसकी चूत के बारे में सोच कर मूठ मरता। रेखा इतने खुले दिल की लड़की थी कि मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत न हो रही थी। बात-चीत, चुहलबाजी अलग बात है और चुदाई अलग बात। वैसे भी सप्ताह में २ दिन बहुत था कि मैं घर पर होता और रेखा के झाँट के बाल के दर्शन होते। एक दिन तो खुब सारे बाल मुझे कमोड पर दिखे, करीब २० बाल। ऐसा लग रहा था जैसे उसने अपने हाथों से अपने बाल उखाड़ कर वहाँ गिराएँ हों। उस दिन संयोग से दीदी-जीजाजी एक दिन के लिए बगल के शहर के मंदिर गये थे, एक पूजा कराने, सो मैंने हिम्मत की। मैंने रेखा को आवाज लगाई तो वो आई और मैं उसे सीधे बाथरूम में ले गया, फ़िर पूछा - "यह सब क्या है?" रेखा ऐसे कि जैसे कुछ समझी हीं ना हो, तो मैंने कमोड के उपर की साईड पर गिरे कुछ बालों को उठा लिया और फ़िर उसको दिखा कर पूछा, "ये सब क्या है?" अब वो हकलाई, "जी ब बा बाल है भैया जी"। मैं उसकी हकलाहट पर खुश हुआ और बोला, "कैसे नहाती हो रेखा तुम कि तुम्हारे बदन का रोआँ भी नहीं भींगता? ठीक से नहाया करो, साफ़-सुथरा रहा करो।" अब वो हिम्मत करके बोली, "जी भैया जी, साफ़ से हीं नहाते हैं। उस पर तो नहाने के पहले बैठते हैं न, सो तब हीं कुछ बाल गिर जाता है।" अब मैं नासमझ की ऐक्टिंग करते हुए बोला, "ओह हो, समझा। मैं इसको अभी तक काँख का बाल समझ रहा था।" रेखा मुस्कुराई, "नहीं नहीं भैया जी यह तो मेरा प्राईवेट वाला बाल है।" मैं अब बुद्धु सा बनते हुए कहा, "और मुझे देखो, मुझे यह बाल देख कर लगा कि यह तुम्हारे काँख का बाल है। मुझे तो पहले हीं समझ में जाना चाहिए था यह तुम्हारा झाँट है। तुम्हारे काँख में तो सीधा-सीधा बाल है, जबकि यह तो मुड़ा हुआ घुंघराला सा है।" रेखा भी सम्हज हो कर बोली, "जी भैया जी, मेरा काँख में तो सीधा बाल सब है, देखिए।" कह कर उसने अपने हाथ उपर कर दिए ताकि मैं उसके बगल के बाल देख सकूँ। जब मैं उसके काँख के बाल का अवलोकन कर रहा था, तब वो बोली, "यह सब तो पतला भी बहुत है, और रंग भी ऐसा काला नहीं है। जबकि मेरा प्राईवेट वाला बाल बहुत घना, काला और घुंघराला है।"

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Posted : 14/11/2011 8:31 am
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Posted : 14/11/2011 8:31 am
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मैंने अपनी हथेली पर रखे उसके झाँट और उसकी काँख को देखते हुए बोला, "सही में, यह तो तुम्हारे काँख के बाल बहुत मजबूत है और बड़ा भी। तीन इंच का जरुर होगा। और हाँ, ये "प्राईवेट वाला बाल" क्यों बोलती हो इसको, "झाँट" बोलो। जवान लड़का-लड़की को "बाल" नहीं "झाँट" होता है। देखती हो, जीजाजी भी दीदी को उस दिन कह रहे थे कि बहुत दिन हो गया है अब वो अपना झाँट साफ़ कर ले। बेचारी दीदी कैसे मेरे सामने यह सुन कर झेंप गई थी।" रेखा ने भोलेपन से कहा, "हमको लाज लगता है बोलने में, आज तक कभी बोली नहीं न, आपके दीदी-जीजाजी तो सब कुछ खुल्लम्खुल्ला बोलते रहते हैं।" मैं बोला, "हाँ इसीलिए तो मैं ऊपर रहता हूँ, ताकि दीदी को मेरे सामने शर्म महसूस न हो।" रेखा अब थोड़ा एक्साईटेड हो कर बोली, "अरे भैया जी, आपके दीदी को कोई शर्म-वर्म नहीं लगता है। मेरे सामने गोदी में बैठ कर चुम्मा-चाटी करती है। फ़िर दोनों उठ कर रूम में बंद हो जाते हैं। जब बाहर आते हैं तो दोनों का चेहरा लाल, तमतमाया हुआ होता है।" मेरा लन्ड अब फ़ड़कने लगा था। मैं पूछा, "फ़िर तुम क्या करती हो?" अब वो सकपकाई, "म्म हम क्या करेंगे, कुछ नहीं। ऊ लोग का जिन्दगी है, जो करें।" मैं फ़िर बात को वापस ट्रेक पर लाया, "अच्छा रेखा, अब चलो तीन बार मेरे सामने बोलो, "झाँट, झाँट, झाँट।, इसके बाद बताओ कि रोज तुम्हारा इतना झाँट कैसे टुट कर गिर जाता है।" रेखा नजर नीचे करके बोली, "हमसे नहीं बोलाएगा यह।" मैं अब उसको प्यार से बोला, "एक बार कोशिश करो। जवानी में यह सब बोलने से अच्छा लगता है एक बार बोल कर देखो। फ़िर मैं भी बताऊँगा कि मैं जब तुम्हारे झाँटों को देखता हूँ तो मैं बंद बाथरुम में क्या करता हूँ।" वो मेरे से नजर मिलाई और जाने लगी, "हमको किचेन में काम है"। मैं अब उसको अपने साथ बाथरुम से बाहर लाया और अपने बेड पे बिठा दिया (मेरे नहीं रहने पर वैसे भी वो उसी बेड पर सोती थी), फ़िर बोला, "देखो, आज तो कोई काम है नहीं। छुट्टी का दिन है। आज एक बार बोल कर देखो न।" मेरे बार-बार कहने पर वो नजर नीची कर के हीं धीरे से बोली, "झाँट - अब हो गया न"। मैं बोला, "हाँ अब तीन बार बोलो, मेरी तरफ़ देख कर। फ़िर मैं बताऊँगा कि मैं क्या करता हूँ।" वो इस बार मेरे से नजर मिला कर बोली, "झाँट झाँट झाँट" और अपना चेहरा अपने हथेलियों से ढ़क लिया और वैसे हीं बोली अब आप बताईए।" मैं बोला, "क्या बताऊँ?" रेखा बोली, "इसी को देख के"। मैं बोला, "किसको देख कर?" रेखा बोली, "यही बाल देख कर"। मैं टोका, "फ़िर बाल?" रेखा अब मुस्कुरा कर बोली, "ओह नहीं, मेरा झाँट देख कर?" मैं अब बोला, "देखी, कैसे यह शब्द तुमको मेरे साथ खोल दिया।" रेखा बोली, "कैसे?" मैं हँसते हुए कहा, "देखी तीन बार झाँट शब्द बोली और फ़िर अपने झाँट की बात करने लगी। अभी तो तुम बोली कि "मेरा झाँट" देख कर आप क्या करते हैं।" रेखा भी अब मेरे साथ खुलने लगी थी सो बोली, "ठीक है ठीक है, अब बताईए न।"

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Posted : 14/11/2011 8:32 am
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Posted : 14/11/2011 8:32 am
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मैं अब शरारत के मूड में था, "अगर मैं नहीं बताऊँगा तो क्या करोगी?" रेखा भी मुस्कुराते हुए बोली, "तब कल से हम अपना झाँट पानी से बहा देंगे, फ़िर देखने को भी नहीं मिलेगा।" मेरा लन्ड यह सुन कर एक झटका खा गया। साली तो अपने जानते-समझते मुझे अपने झाँट दिखाती थी। मैं अब उसको घुरते हुए बोला, "अच्छा तो मुझे जान-बूझ कर अपना झाँट दिखाती थी, और मैं बुद्धु तुम्हें बच्ची समझता था।" अबकि बार रेखा असल लौन्डिया की अदा के साथ बोली, "बच्ची कैसे समझ गए हमको, अभी तो आप बोले थी कि जवान लड़का-लड़की को झाँट होता है।" मैं बोला, "सो तो है...पर आईने में देखो अपने को फ़्राक-या सलवार-सूट में १२-१३ साल की लगती हो देख कर। रेखा ४’१०" की छॊटी सी लड़की थी।"

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Posted : 14/11/2011 8:32 am
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Posted : 14/11/2011 8:33 am
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रेखा भी अब बोली, "ऐसा बच्ची भी नहीं दिखते हैं। सब लोग खुब लाईन मारते हैं हम पर।" मैं पूछा, "अच्छा कौन लाईन मारता है। मैंने तो नहीं मारा कभी?" वो बोली, "क्या पता, आप भी मन में लाईन मारते होंगे। ऐसे तो सब मारता है मेरे गाँव में भी और यहाँ भी। आपके जीजाजी भी जब दीदी को चुम्मा लेते हैं तो मेरे तरफ़ देखते हैं। आपके दीदी तो हमेशा आँख बन्द कर लेती है, जब उनको चुम्मा लेते हैं जीजाजी तब। उनको कहाँ पता है यह सब।" मैं बोला, "अरे जब जीजा जी को मौका मिला हुआ है कि घर पर एक लड़की के रहते हुए सब मजा लें तो वो क्यों नहीं मजा लेंगे। ऐसे भी किसी के सामने यह सब करने में ज्यादा मजा आता है। शुरु में भले अकेले हो पर बाद में तो खुल कर करने में मजा आता है।" रेखा बोली, "वही तो, एक दिन जब आप नहीं थे तो वो खाना खाते हुए वो बोले भी थी कि स्वीटी कभी अपने छॊटे भाई के सामने भी तो ऐसे खुल कर मेरी गोदी में बैठ कर मस्ती करो। साले साहब को पता तो चलें कि उनकी दीदी का कितना ख्याल रखा जा रहा है। आपकी दीदी तब उनके गोदी में बैठ कर उनको खाना खिला रही थी।" मैं एक गहरी साँस छॊड़ते हुए कहा, "हाँ रेखा, मुझे पता है कि अगर जीजाजी को दीदी जरा भी लिफ़्ट दी तो वो मेरे सामने दीदी को नंगा कर देंगे। इसीलिए तो मैं जरा अलग रहता हूँ उनसे।" रेखा बोली, "अरे नहीं भैया जी, आज तक वो कभी आपके दीदी का कपड़ा मेरे सामने भी नहीं हटाए हैं। चुम्मा-चाटी करते हैं, पर बाकी सब रुम बंद करके करते हैं।" मैं थोड़ा सोंचा फ़िर पूछा, "कभी देखी हो दोनों रुम बंद करके क्या करते हैं?" रेखा थोड़ा सोच कर बोली, "हाँ साईड वाली खिड़की से थोड़ा-मोड़ा झांक कर देखी थी दो-चार बार। वो खिड़की पूरा ठीक से बन्द नहीं होता है। बाकि जल्दी हीं हम हट गए, अगर वो लोग देख लेते तो क्या सोचते मेरे बारे में। वैसे भी देख कर अजीब लगता है पूरा देह में।" मैं अब थोड़ा चौंका, "खिड़की से सब साफ़ दिखा था?" रेखा बोली, "जी भैया जी, एक दम सामने हीं बेड है उनका। आप को देखने का मन है तो कभी भी देख लीजिएगा रात में। तब बाहर में थोड़ा अंधेरा रहता है, भीतर रूम में बत्ती जला रहता है। पर हमारा बात और था, आपकी दीदी हैं।" मैं बोला, "वही तो, सोचना पड़ेगा कि देखूँ कि नहीं।"

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Posted : 14/11/2011 8:33 am
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Posted : 14/11/2011 8:35 am
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